September 6, 2018 digital_payment

डिजिटल पेमेंट मार्केट में घमासान, जानिए कौन-कौन है मैदान में

दरअसल, मौजूदा दौर में पेटीएम और फेसबुक इंक के वाट्‌सएप से लेकर गूगल तक डिजिटल पेमेंट कंपनियों की एक पूरी लिस्ट उपलब्ध है। ये सभी कंपनियां भारतीय यूजर्स की पहली पसंद बनने की होड़ में हैं और इस बाजार में अपनी अलग पहचान बनना एवं लोगों का भरोसा जीतना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

इस कारोबार में बड़े मौके को देखते हुए मशहूर निवेशक वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे इंक ने हाल ही में भारतीय डिजिटल पेमेंट मार्केट के लीडर पेटीएम में हिस्सेदारी खरीदी है। इस बाजार में कुछ अन्य कंपनियां भी जोर आजमाइश के लिए कमर कस रही हैं, जिनमें कुछ बैंक और डाक विभाग भी शामिल हैं। इस मामले में भारत के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी भी किसी से पीछे नहीं रहना चाहते।

शहरी युवाओं ने भरा जोश

भारतीय डिजिटल पेमेंट मार्केट ने दो साल पहले तब हल्का विस्तार पाया था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने एकाएक ज्यादातर मौजूदा करेंसी नोटों के चलन पर पाबंदी लगा दी थी। हालांकि आगे का काम आसान नहीं रहा और पर्याप्त संख्या में नए करेंसी नोट छपने तक बैंक शाखाओं और एटीएम के बाहर लंबी- लंबी कतारें देखने को मिलीं।

चूंकि लोगों की परेशानियां अचानक काफी बढ़ गईं, लिहाजा सरकार के इस कदम का विरोध भी हुआ। लेकिन, तब से लेकर अब तक एक के बाद एक नए मोबाइल ऐप्स लॉन्च होते गए, जिन्होंने भुगतान का काम आसान कर दिया। चूंकि इन ऐप्स के जरिए भुगतान करने पर डिस्काउंट और कैश बोनस मिल रहे हैं, लिहाजा युवाओं के बीच डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है।

70 फीसदी लेनदेन अब भी नकद
क्रेडिट सुइस ग्रुप एजी ने अनुमान लगाया है कि साल 2023 तक भारतीय डिजिटल पेमेंट मार्केट 1 लाख करोड़डॉलर (करीब 70.7 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच जाएगा, जो फिलहाल करीब 20 हजार करोड़ डॉलर (लगभग 14 लाख करोड़ रुपए) का है। क्रेडिट सुइस के मुताबिक हालांकि वैल्यू के हिसाब से भारत में अब भी लगभग 70 फीसदी लेनदेन नकद में होता है। इसकी तुलना में चीन की स्थिति बेहतर है। वहां का मोबाइल पेमेंट मार्केट 5 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा का है।

लेकिन, इस मामले में एक बड़ा फर्क है। चीन के डिजिटल पेमेंट कारोबार में स्थानीय कंपनियों की मजबूत पकड़ है, जबकि भारत में ऐसी स्थिति नहीं है। इसकी वजह यह है कि मोदी प्रशासन भारत के हर हिस्से में वित्तीय सेवाओं का तेज विस्तार के मकसद से विदेशी कंपनियों का स्वागत कर रहा है।

भारत जैसा बाजार कहीं नहीं
विशेष महारत रखने वाली सलाहकार फर्म पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर विवेक बेलगावी ने कहा, ‘इतना शानदार बाजार दुनिया में और कहीं भी मौजूद नहीं है।’ फिर भी इस मामले में एक बड़ी परेशानी है और वो यह कि भारतीय पेमेंट मार्केट बड़े पैमाने पर अराजक बना हुआ है।

यहां ढेर सारे ऐसे नियम-कायदे हैं, जिनके कारण कंपनियां यूजर्स को उस पैमाने पर अपने-अपनेहिसाब से ऑफर नहीं दे सकतीं, जिस पैमाने पर अन्य देशों में दिया जाता है। इसके अलावा यूजर्स भी अक्सर एक ऐप से दूसरे ऐप का रुख करते देखे जाते हैं। बेंगलुरू के वकील राहुल मठान का कहना है कि उन्होंने करीब सभी प्रमुख पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल किया है, लेकिन अब उन्होंने अधिकांश लेन-देन भीम, पेटीएम और वाट्‌सएप तक सीमित कर लिया है।

यह स्थिति डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए कतई अच्छी नहीं मानी जा सकती। मसलन, सिंगापुर की मैकिंजी एंड कंपनी के सीनियर पार्टनर नायक एचवी जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि इस उद्योग के क्षितिज में मुनाफे की स्थिति करीब नहीं है। जाहिर है, कंपनियों को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ेगा।

डिजिटल पेमेंट मार्केट की प्रतिस्पर्धा पर एक नजर
नई दस्तक
सार्वजनिक क्षेत्र के डाक विभाग की तरफ से स्थापित इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक ने 650 ब्रांच और 3,250 सुविधा केंद्रों के साथ ऑपरेशन शुरू कर दिया है। इसके हजारों प्रशिक्षित डाकिए दूर-दराज के इलाकों में घर-घर जाकर लोगों को बता रहे हैं कि उसके ऐप का इस्तेमाल कैसे करना है। यह बड़ी पहल है। इसके अलावा जियो मोबाइल सर्विस के माध्यम से मुकेश अंबानी का डिजिटल पेमेंट्‌स बिजनेसभी प्रतिद्वंद्वियों को झटका देने की क्षमता रखता है।

गूगल की तेज, अब गूगल पे

गूगल का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों के दौरान भारत में 5 करोड़ से ज्यादा लोगों ने उसका पेमेंट ऐप डाउनलोड किया है। पिछले हफ्ते कंपनी ने इसकी रीब्रांडिंग करते हुए इसका नाम ‘गूगल पे’ रख दिया। इसके यूजर्स तेजी से बढ़ रहे हैं और कंपनी ‘यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस’ (यूपीआई) का इस्तेमाल करके लेनदेन की कुल संख्या बढ़ाने में सफल रही है। यूपीआई के जरिए 100 से ज्यादा बैंक आपस में जुड़े हुए हैं और इससे वास्तविक समय में डिजिटल लेनदेन होता है।

खूबीः गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई का कहना है कि गूगल पे भारत को लेकर कंपनी की रणनीति के केंद्र में है। इसके अलावा यह वैश्विक पैमाने पर गूगल के पेमेंट बिजनेस को विस्तार देने में मील का पत्थर भी साबित होगा। यह पेमेंट ऐप पूरी तरह स्थानीय जरूरतों के हिसाब से तैयारकिया गया है, जो कुछ भारतीय भाषाओं को भी सपोर्ट करता है। यह एक खास गेम के जरिए युवा यूजर्स को टारगेट कर रहा है, जिसके तहत कैशबैक की पेशकश की जाती है।

कमजोरीः गूगल पेमेंट ऐप को सबसे बड़ी चुनौती वाट्‌सऐप से मिल रही है, जिसके पास मैसेजिंग सर्विस के चलते मजबूत यूजर बेस है। ऐसे में जब वाट्‌सऐप पेमेंट सर्विस की पूर्ण लांचिंग हो जाएगी तो गूगल को ग्राहक मिलना मुश्किल हो सकता है। गूगल ने काफी देर से चैट फीचर पेश किया है।

फेसबुक का वाट्‌सऐप

इसी साल फरवरी में पहली बार लाखों भारतीयों के बीच अपनी पेमेंट सर्विस का परीक्षण किया था।
खूबीः वाट्‌सऐप देश का सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप है, जिसके करीब 25 करोड़ यूजर्स रोजाना परिवार के सदस्यों और दोस्तों को टेक्स्ट मैसेज करते हैं। इस लिहाज से वाट्‌सऐप को पेमेंट सर्विस के लिए ग्राहक हासिल करने के वास्ते पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

कमजोरीः यह सर्विस परीक्षण चरण में ही फंस गई और इसकी देशव्यापी लांचिंग यूजर्स के डेटा भंडारण जैसे मामलों में नियामक के स्तर पर सवाल उठाने से बाधित हुई। बहरहाल, सरकार फर्जी खबरें और वीडियो पर लगाम लगाने में विफल रहने के लिए वाट्‌सऐप को फटकार लगा रही है। सरकार का कहना है कि इसके जरिए अफवाहें फैलाई जा रही हैं और भीड़ की हिंसा बढ़ी हैं। ऐसे में पेमेंट सर्विस की पूर्ण लांचिंग में वक्त लग सकता है।

पेटीएम

इस डिजिटल पेमेंट ऐप को चीन की कंपनी अलीबाबा के साथ-साथ एंट फाइनेंशियल सर्विसेज और अब वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे का भी समर्थन प्राप्त है। पेटीएम फिलहाल भारत की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट कंपनी है। इसका दावा है कि अब तक यह ऐप 15 करोड़ लोगों ने डाउनलोड कर लिया है।

खूबीः चूंकि पेटीएम ने अपनी सेवाएं काफी पहले शुरू कर दी थी, लिहाजा इस कंपनी को नवंबर, 2016 में हुई नोटबंदी का सबसे ज्यादा फायदा मिला। वजह यह रही कि उस दौरान लोगों को अचानक नकदी की किल्लत का सामना करना पड़ा और ऐसे में डिजिटल पेमेंट उनके लिए लेनदेन का सुविधाजनक जरिया बन गया। और डिस्काउंट के जरिए मर्चेंट्‌स और दुकानों का एक बड़ा नेटवर्क बना लिया है, ताकि यूजर्स उसके साथ बने रहें।

कमजोरीः चूंकि यह लाइसेंस प्राप्त पेमेंट्‌स बैंक है, लिहाजा पेटीएम के यूजर्स को कई चरणों की नामांकन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके विपरीत फोनपे जैसे ज्यादातर प्रतिस्पर्धी वॉलेट्‌स के साथ ऐसा नहीं है। बैंकिंग नियमक ने हाल ही में पेटीएम को अस्थायी तौर पर नए यूजर्स को एनलिस्ट करने से रोक दिया था। वजह यह थी कि कंपनी ने कुछ नियमों का अच्छी तरह पालन नहीं किया था। बहरहाल, कंपनी ने कहा कि उसने नियामक की चिंता दूर कर दी है

फ्लिपकार्ट का फोनपे

फोनपे का दावा है कि अब तक 13.3 करोड़ लोगों ने यह ऐप डाउनलोड कर लिया है।

खूबीः जब रिटेल सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी वॉलमार्ट इंक ने फोनपे की मूल कंपनी ‘फ्लिपकार्ट ऑनलाइन सर्विसेज’ में निर्णायक हिस्सेदारी खरीद ली तो इसके साथ ही कंपनी के पेमेंट ऐप को भी एक मजबूत ग्लोबलकंपनी का सहारा मिल गया। अब तक जो संकेत मिले हैं, उनके हिसाब से फोनपे को पहले ही वॉलमार्ट की मजबूत वित्तीय स्थिति का फायदा मिल गया है। इसे हाल ही में फ्लिपकार्ट की तरफ से करीब 466 करोड़ रुपए की पूंजी मिली है।

कमजोरीः फ्लिपकार्ट की सबसे नजदीकी प्रतिस्पर्धी कंपनी अमेजन अपने खुद के वॉलेट अमेजन पे में लगातार निवेश कर रही है। नतीजतन इसका यूजर बेस बढ़ रहा है। यह बड़ी चुनौती है।

भीम

इस ऐप को अब तक 3.2 करोड़ लोगों ने डाउनलोड कर लिया है। इसे यूपीआई ने डिजाइन किया है। यह सरकार की अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस है। यह ऐप सरल और तेज है। इस वजह से यह छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के वैसे लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है, जिन्हें टेक्नोलॉजी से ज्यादा वास्ता नहीं होता।

खूबीः सरकार ने पूरी सक्रियता से भीम ऐप को प्रोत्साहित किया है। इस ब्रांड को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। यही नहीं, इसका यूजर बेस बढ़ाने के लिए बैंकों और सरकारी संस्थाओं को इसके जरिए लेनदेन के टारगेट दिए जा रहे हैं।

कमजोरीः शुरुआत में तेजी से लोकप्रियता हासिल करने के बाद यह ऐप अपनी रफ्तार बरकरार रखने में विफल रही। कारण यह है कि इसके मुकाबले बाजार में मौजूद अन्य ऐप के प्रमोटर्स भारी-भरकम निवेश की बदौलत आकर्षक ऑफर के जरिए ग्राहकों को अपनी तरफ खींच रहे हैं।

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